शब्दार्थ
लिये
liye
hipostposition
अर्थ
के वास्ते; के उद्देश्य से; की ख़ातिर।
विस्तार
काव्य में 'लिये' (प्रायः 'के लिये') उद्देश्य, निमित्त या समर्पण का भाव प्रकट करने वाला परसर्ग है। प्रस्तुत शेर में यह 'सज्दे के लिये' के संदर्भ में सर झुकाने के उद्देश्य को दर्शाता है। व्याकरणिक रूप से यह 'लेना' क्रिया का भूतकालिक रूप भी होता है।
व्युत्पत्ति
Sanskrit 'लभते' (labhate, to take/obtain) evolving via Prakrit into the Hindustani verb 'lenā' (लेना), whose oblique participial form grammaticalized into a postposition of purpose.
प्रयोग
In the ghazal, 'ke liye' frequently appears to express devotion, dedicated suffering, or the driving motive behind the lover's trials.
उदाहरण
तेरे लिये दिल की हर आरज़ू क़ुर्बान की
सजदे के लिये सर का झुकना
समानार्थी
वास्तेख़ातिरहेतु
संबंधित शब्द
लेनावास्तेख़ातिर
