शब्दार्थ
लाइक़
lā'iq
hiadjective
अर्थ
योग्य, पात्र, काबिल, या उपयुक्त।
विस्तार
उर्दू शायरी में 'लाइक़' का अर्थ किसी बात या बर्ताव के योग्य, पात्र अथवा क़ाबिल होना है। इस शे'र में यह 'लाइक़-ए-ताज़ीर' (सज़ा का हक़दार) के रूप में आया है, जहाँ आशिक़ स्वीकार करता है कि महबूब को नाम लेकर पुकारना एक ऐसी गुस्ताख़ी थी जो सज़ा के क़ाबिल थी। यह शब्द कवि की विनम्रता और अपनी सीमा के बोध को दर्शाता है।
व्युत्पत्ति
Arabic لَائِق (lā'iq), active participle of the root ل-ي-ق (l-y-q), meaning befitting, appropriate, or suitable.
प्रयोग
Commonly forms Persian izafat compounds in classical ghazal to denote fitness for grief, censure, or affection.
उदाहरण
लाइक़-ए-तहसीन (प्रशंसा का पात्र)
लाइक़-ए-तवज्जोह (ध्यान देने योग्य)
समानार्थी
क़ाबिलपात्रसज़ावारमुस्तहक़
संबंधित शब्द
लियाक़तना-लाइक़ताज़ीर
