शब्दार्थ
रहो
raho
hiverb
अर्थ
रहो, ठहरो या जीवन बसर करो (आज्ञार्थक/संभाव्य)।
विस्तार
'रहो' क्रिया 'रहना' का मध्यम पुरुष का रूप है, जो आदेश, अनुरोध या विवशता प्रकट करता है। इस शे'र में यह दिवंगत प्रियजन (आरिफ़) के अकेले चले जाने पर एक गहरा दर्द और व्यंग्यपूर्ण विलाप प्रकट करता है। यहाँ इसका तात्पर्य कब्र या परलोक के अकेलेपन को सहते रहने से है।
व्युत्पत्ति
From Sanskrit रहति (rahati, 'leaves, separates') via Prakrit रहइ (rahaï) into Old Hindi/Hindavi 'rahnā'.
प्रयोग
In classical Urdu ghazal, 'raho' frequently serves as an emotive imperative to evoke solitude, patience, or continued suffering.
उदाहरण
रहो ख़ामोश अब कोई फ़ायदा नहीं
रहो ग़म में मुब्तला कोई दिन और
समानार्थी
ठहरोबसोटिको
संबंधित शब्द
रहनारहारहेंगेरहगुज़र
