शब्दार्थ

रखी

rakhi

hiverb

अर्थ

रखी, रखी हुई या मुँह पर लगाई।

विस्तार

उर्दू शायरी में 'रखी' क्रिया 'रखना' का स्त्रीलिंग भूतकालिक रूप है। इस शेर में यह मुँह पर आस्तीन न लगाने या न रखने के अर्थ में आया है, जिससे आँसू छिपाने का प्रयास न करना प्रकट होता है। यह प्रेमी के बेबाक दुःख और ज़ब्त की पराकाष्ठा को दर्शाता है।

व्युत्पत्ति

Sanskrit 'rakṣati' (protects, preserves) through Prakrit 'rakkhaï' into Hindustani 'rakhna'.

प्रयोग

Frequently occurs in ghazals in the context of maintaining honor, keeping secrets, or placing hands and sleeves over the face in grief.

उदाहरण

हम ने उस की याद दिल में महफ़ूज़ रखी।

ज़ब्त-ए-ग़म में मुँह पर आस्तीन न रखी।

समानार्थी

धरीलगाईक़ायम की

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रखनारखरखा
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