शब्दार्थ

राज़-दाँ

rāz-dāñ

hinoun

अर्थ

भेदिया, गुप्त बातों का जानने वाला, विश्वासपात्र मित्र।

विस्तार

शास्त्रीय उर्दू शायरी में 'राज़-दाँ' उस विश्वस्त साथी को कहते हैं जो आशिक़ के गहरे रहस्यों और दुखों से वाक़िफ़ हो। इस शे'र में ग़ालिब अफ़सोस जताते हैं कि उनके ग़म-ख़्वार ने ज़रा सी भी ताब न लाकर उनके राज़ को ज़ाहिर कर दिया और उन्हें रुसवा कर दिया। शायर के अनुसार जो ग़म की तपिश बर्दाश्त न कर सके, उसे भेदिया बनाने का कोई हक़ नहीं।

व्युत्पत्ति

Persian compound formed from 'rāz' (secret, mystery) and the present stem 'dān' (from 'dānistan', to know).

प्रयोग

Commonly invoked in the ghazal tradition to explore themes of betrayal, discretion, and the tragic consequences of misplaced trust.

उदाहरण

कोई न बना इस ग़म में हमारा राज़-दाँ।

हर किसी को दिल का राज़-दाँ नहीं बनाया जाता।

समानार्थी

हम-राज़राज़-दारमहरम

संबंधित शब्द

राज़राज़-दारीराज़-ओ-नियाज़
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