शब्दार्थ

रोज़गार-फ़रेब

rozgār-fareb

hinoun

अर्थ

ज़माने या दुनिया का धोखा; आजीविका का छलावा।

विस्तार

शास्त्रीय शायरी में 'रोज़गार-फ़रेब' का अर्थ दुनिया, ज़माने या आजीविका द्वारा दिए जाने वाले धोखे से है। मीर के शे'र में यह ज़माने की सतही मेहरबानी और दुनियादारी की झूठी तसल्ली को दर्शाता है। यह शब्द सांसारिक मोह-माया और काल-चक्र की अस्थिरता पर गहरी चोट करता है।

व्युत्पत्ति

Persian compound formed from 'rozgār' (time, world, fortune, livelihood) and 'fareb' (deception, trickery).

प्रयोग

Frequently employed in ghazals to evoke the deceptive allure of worldly fortune and the treachery of worldly time.

उदाहरण

मत फँस इस दुनिया के जाल में, यह सब रोज़गार-फ़रेब है।

अहल-ए-दिल को रोज़गार-फ़रेब से क्या सरोकार।

समानार्थी

दहर-फ़रेबजहाँ-फ़रेबफ़रेब-ए-दहर

संबंधित शब्द

ग़म-ए-रोज़गारइल्तिफ़ात-ए-ज़मानागर्दिश-ए-अय्यामदहर
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