शब्दार्थ

रौज़ा-ख़्वाँ

rauza-khwāñ

hinoun

अर्थ

शोकगीत या मर्सिया पढ़ने वाला; लाक्षणिक रूप से बाग़ का गायक।

विस्तार

पारंपरिक तौर पर 'रौज़ा-ख़्वाँ' कर्बला के शहीदों के मर्सिए और शोक-कथाएँ सुनाने वाले को कहते हैं, जिसका आधार 'रौज़त-उश-शुहदा' का पाठ है। शायरी में 'रौज़ा' के दोहरे अर्थ (बाग़ और मज़ार) के ज़रिए श्लेष रचकर बुलबुल या आशिक़ को चमन का शोकगीतकार कहा जाता है। इस शे'र में यह क़फ़स में बंद होने से पहले चमन के मुख्य गायक अथवा विलापकार के गरिमामय पद को दर्शाता है।

व्युत्पत्ति

Compound of Arabic 'rawdah' (garden, mausoleum) and Persian 'khwan' (stem of khwandan, to recite/read).

प्रयोग

Poets employ the term through poetic punning (īhām) to equate the religious elegist of a shrine with the nightingale lamenting a garden.

उदाहरण

रौज़ा-ख़्वाँ का सोज़-ओ-गुदाज़

गुलशन में रौज़ा-ख़्वाँ की सदा

समानार्थी

मर्सिया-ख़्वाँनौहा-ख़्वाँसोज़-ख़्वाँ

संबंधित शब्द

रौज़ामर्सियानालग़ीक़फ़स
← शब्दकोश पर वापस