शब्दार्थ
राएगाँ
rāegāñ
hiadjective
अर्थ
व्यर्थ, बेकार, निष्फल या अकारथ।
विस्तार
उर्दू शायरी में 'राएगाँ' का प्रयोग किसी अनमोल चीज़, ख़ास तौर पर जीवन या जतन के व्यर्थ चले जाने के लिए किया जाता है। प्रस्तुत शेर में शायर का अफ़सोस है कि उसकी अनमोल ज़िंदगी मूल मक़सद से दूर रहकर अकारथ नष्ट हो गई। यह शब्द गुज़रे हुए वक़्त और अधूरी आरज़ू के मलाल को शिद्दत से बयां करता है।
व्युत्पत्ति
Persian (رایگان / rāygān, originally meaning gratis or obtained without effort, which in Urdu evolved into wasted or in vain).
प्रयोग
In ghazals, it is predominantly paired with 'उम्र' (life) or 'सई' (effort) alongside verbs like 'जाना' or 'होना' to convey irreversible regret.
उदाहरण
सारी उम्र यूँ ही राएगाँ गुज़र गई।
मोहब्बत की कोई सदा राएगाँ नहीं जाती।
समानार्थी
व्यर्थअकारथबेकारफ़िज़ूल
संबंधित शब्द
उम्र-ए-अज़ीज़बर्बादहसरतज़िया
