शब्दार्थ

यक-आईना-दार

yak-ā'īna-dār

hiadjective

अर्थ

दर्पण धारण करने वाला; पूर्णतः प्रतिबिंबित करने वाला।

विस्तार

फ़ारसी-उर्दू शायरी में 'यक' पूर्णता या एकाग्रता को दर्शाता है और 'आईना-दार' दर्पण थामने वाले अथवा अक्स दिखाने वाले को कहते हैं। इस शे'र में इसका प्रयोग यह प्रकट करने के लिए हुआ है कि शायर सिर से पाँव तक टूटने और बिखराव (शिकस्तन) का प्रत्यक्ष दर्पण बन गया है। यह अंतर्मन के सम्पूर्ण अवसाद के सजीव प्रकटीकरण का रूपक है।

व्युत्पत्ति

Persian compound: 'yak' (one, singular) + 'ā'īna' (mirror) + 'dār' (holder/bearer, from dāshtan).

प्रयोग

Employed in the ghazal to evoke absolute transparency, passive reception, or becoming a total reflection of inner suffering.

उदाहरण

यक-आईना-दार-ए-हैरत होना

सरापा यक-आईना-दार-ए-शिकस्तन

समानार्थी

आईना-दारअक्स-नुमाआईना-रूजल्वा-नुमा

संबंधित शब्द

आईनाशिकस्तसरापाहैरत
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