शब्दार्थ
यक-अफ़्ग़ाँ
yak-afghāñ
hinoun
अर्थ
एक आह या एक अकेली फ़रियाद।
विस्तार
शास्त्रीय शायरी में 'यक-अफ़्ग़ाँ' का अर्थ एक अकेली आह या विलाप की पुकार है। प्रस्तुत शे'र में यह विवशता की उस दशा को दर्शाता है जहाँ दर्दों के अथाह हुजूम के बावजूद हैरत के मारे ज़बान से एक फ़रियाद भी नहीं निकल पाती।
व्युत्पत्ति
Persian compound of 'yak' (یک, meaning 'one') and 'afghān' (افغان, meaning 'cry, lamentation, wailing').
प्रयोग
Frequently used in the ghazal to highlight the contrast between immense internal suffering and the total inability to utter even a minimal complaint.
उदाहरण
लब पे यक-अफ़्ग़ाँ भी न आई
यक-अफ़्ग़ाँ की भी मोहलत न मिली
समानार्थी
यक-नालाएक आहयक-फ़रियाद
संबंधित शब्द
अफ़्ग़ाँनालाफ़ुग़ाँहैरत
