शब्दार्थ
मशक़
mashq
hinoun
अर्थ
अभ्यास, रियाज़, निरंतर साधन या प्रदर्शन।
विस्तार
शास्त्रीय शायरी में 'मश्क़' का अर्थ अभ्यास, साधना या किसी क्रिया का निरंतर रियाज़ होता है। इस शेर में 'सर्फ़-ए-मश्क़' का भाव यह है कि बहार की गरिमा को प्रकट करने के निरंतर अभ्यास में सब कुछ व्यय हो गया है। यह साधना के उस उत्कर्ष को दिखाता है जिससे चिनार के पत्ते मेहंदी की तरह सुर्ख़ हो गए हैं।
व्युत्पत्ति
Arabic (مَشْق, mashq), originally referring to stretching, drawing out, or practicing calligraphy.
प्रयोग
Frequently compounded in ghazals to express either the poet's artistic discipline (mashq-e-sukhan) or the beloved's unending torment (mashq-e-sitam).
उदाहरण
मश्क़-ए-सुख़न जारी रखना
मश्क़-ए-सितम की आदत
समानार्थी
अभ्यासरियाज़साधना
संबंधित शब्द
मश्क़-ए-सुख़नमश्क़-ए-नाज़मश्क़ी
