शब्दार्थ

मश्क़

Mashq

hinoun (feminine)

अर्थ

अभ्यास, रियाज़, निरंतर साधना, कसरत, सीखने का कार्य

विस्तार

उर्दू और फ़ारसी-प्रभावित शायरी में 'मश्क़' का प्रयोग निरंतर अभ्यास, रियाज़ या किसी कला (जैसे सुलेख या शायरी) को निखारने की साधना के लिए होता है। लाक्षणिक रूप से यह दुख सहने के अभ्यास या माशूक़ के जुफ़ा-ओ-सितम की निरंतरता ('मश्क़-ए-सितम') के लिए भी ख़ूब प्रयुक्त होता है।

व्युत्पत्ति

Arabic 'mashq' (مَشْق), originally meaning stretching, drawing out, or practicing writing/calligraphy; borrowed into Persian and Hindustani/Urdu as general practice or drill.

प्रयोग

Widely used in compound genitive phrases (ezaafat) in ghazals, notably 'mashq-e-sukhan' (the craft/practice of poetry) and 'mashq-e-sitam' (the practice of tormenting the lover).

उदाहरण

मश्क़-ए-सुख़न जारी चक्की की मशक़्क़त भी / इक तर्फ़ा तमाशा है 'हसरत' की तबीअत भी — हसरत मोहानी

समानार्थी

रियाज़अभ्याससाधनाकसरततालीम

संबंधित शब्द

मश्क़-ए-सुख़नमश्क़-ए-सितममश्श़ाक़मशक़्क़त
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