शब्दार्थ

मरी

marī

hipronoun

अर्थ

मेरी (काव्य में प्रयुक्त संक्षिप्त रूप, स्त्रीलिंग संबंधवाचक)।

विस्तार

उर्दू शायरी में 'मरी' (या 'मिरी') संबंधवाचक सर्वनाम 'मेरी' का संकुचित रूप (मुख़फ़्फ़फ़) है, जो बह़्र (छंद) के वज़न को संतुलित रखने के लिए प्रयुक्त होता है। प्रस्तुत शेर में यह स्त्रीलिंग संज्ञा 'सर-नविश्त' (क़िस्मत या भाग्य) की विशेषता बताते हुए 'मेरी तक़दीर' का बोध कराता है। यह शायर के निजी दर्द और निराशा की गहन अभिव्यक्ति है।

व्युत्पत्ति

Derived from Middle Indo-Aryan and Apabhramsha roots, traced back to Sanskrit 'madīya' / 'mama' (mine).

प्रयोग

A standard poetic contraction of 'merī' universally employed in classical ghazal metrics to fit short syllables.

उदाहरण

मरी जाँ पर बन गई है

मरी दास्ताँ सुन के रोए

समानार्थी

मेरीअपनी

संबंधित शब्द

मेरामिरामेरीसर-नविश्त
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