शब्दार्थ
मजज़ूब
majzoob
अर्थ
ईश्वरीय प्रेम में लीन मस्त फ़क़ीर या दीवाना साधक।
विस्तार
सूफ़ी चिंतन में 'मजज़ूब' उस साधक को कहते हैं जो ईश्वर के आकर्षण में आत्मविभोर होकर सांसारिक होश खो बैठता है। इस शेर में इक़बाल ने जर्मन दार्शनिक नीत्शे को 'मजज़ूब-ए-फ़रंगी' (पश्चिमी मस्त-दीवाना) कहा है, जिसकी रूहानी तड़प तो तीव्र थी मगर सही दिशा से महरूम थी। इक़बाल का आशय है कि ऐसे विरक्त साधक को ईश्वरीय महानता और किबरियाई की हक़ीक़त से अवगत कराया जा सकता था।
व्युत्पत्ति
Arabic (مجذوب), passive participle from the root j-dh-b (جذب), literally meaning 'drawn' or 'pulled'.
प्रयोग
In classical Urdu poetry, majzoob describes an intoxicated lover or mystic who has bypassed formal ascetic stages due to overpowering divine love.
उदाहरण
हाल-ए-मजज़ूब समझ पाना हर किसी के बस की बात नहीं।
मजज़ूब की बातों में ज़ाहिर तौर पर दीवानगी नज़र आती है।
