शब्दार्थ
मंसूर
Mansoor
अर्थ
मंसूर अल-हल्लाज; सूफ़ी संत जिन्होंने 'अनल-हक़' का नारा दिया।
विस्तार
यह प्रसिद्ध सूफ़ी संत हुसैन इब्न मंसूर अल-हल्लाज का संदर्भ है, जिन्हें 'अनल-हक़' कहने के कारण मृत्युदंड दिया गया था। उर्दू शायरी में वह सामान्यतः ईश्वरीय प्रेम और सत्य के लिए बलिदान के प्रतीक हैं। प्रस्तुत शे'र में शायर उनके रहस्य न छिपा पाने को उथलापन (तुनुक-ज़र्फ़ी) कहते हुए उन पर सूक्ष्म तंज़ करता है।
व्युत्पत्ति
Arabic: from the triconsonantal root n-ṣ-r (ن-ص-ر), passive participle meaning 'aided', 'rendered victorious'; historically used to designate Mansur al-Hallaj.
प्रयोग
Mansoor is invoked in the ghazal as the classic emblem of mystical martyrdom and ecstasy, frequently paired with imagery of the gallows ('daar').
उदाहरण
राज़-ए-हक़ जो मंसूर ने बर-सर-ए-दार कहा
चढ़ के सूली पे दिया जिसने सदा-ए-हक़
