शब्दार्थ
मेराज
Me'raaj
hinoun
अर्थ
ऊर्ध्वगमन; पैग़ंबर की दिव्य यात्रा; बुलंदी या चरम शिखर।
विस्तार
मूलतः इसका अर्थ सीढ़ी या ऊर्ध्वगमन है, जो इस्लामी परंपरा में पैग़ंबर मुहम्मद की अर्श (स्वर्ग) तक की अलौकिक यात्रा को दर्शाता है। शायरी में यह रूहानी बुलंदी, प्रेम के चरम शिखर और मानवीय गरिमा के प्रतीक रूप में प्रयुक्त होता है। प्रस्तुत शेर में यह दर्शाया गया है कि पैग़ंबर के इस सफर ने साबित कर दिया कि आसमान भी इंसान की पहुँच में है।
व्युत्पत्ति
Arabic مِعْرَاج (miʿrāj), derived from the triconsonantal root ع-ر-ج (ʿ-r-j), meaning 'to ascend or climb'.
प्रयोग
Widely used in na'at and mystical verse as the ultimate emblem of spiritual elevation and divine proximity.
उदाहरण
शब-ए-मेराज
मेराज-ए-कमाल
समानार्थी
उरूजबुलंदीइर्तिक़ा
संबंधित शब्द
इसराअर्शसिदरह
