शब्दार्थ
मा'रिज़
ma'riz
hinoun
अर्थ
प्रकट होने, पेश किए जाने या सामने आने का स्थान या अवसर।
विस्तार
'मा'रिज़' का आशय किसी बात के सामने आने, पेश होने या प्रकट होने की स्थिति अथवा स्थान से है। शेर में 'मा'रिज़-ए-इज़हार' का अर्थ अभिव्यक्ति अथवा प्रकटीकरण के दायरे में आना है। शायर को डर है कि यदि उसके सीने का जलता हुआ गुप्त भेद ज़ाहिर हो गया तो भारी तबाही मच जाएगी।
व्युत्पत्ति
Arabic, derived from the triconsonantal root ʿ-r-ḍ (عرض), meaning to present, expose, or show (noun of place/time: ma'riḍ).
प्रयोग
In classical ghazal, it is typically used in izafat constructions like 'ma'riz-e-wujood' or 'ma'riz-e-izhaar' to denote entering a state of existence or disclosure.
उदाहरण
मा'रिज़-ए-वजूद में आना
मा'रिज़-ए-ख़तर में पड़ना
समानार्थी
मक़ाममंज़रमौजह
संबंधित शब्द
अर्ज़इज़हारआरीज़ा
