शब्दार्थ
मारों
māron
hinoun
अर्थ
सताए हुए, पीड़ित या चोट खाए हुए लोग।
विस्तार
शास्त्रीय काव्य में 'मारों' का प्रयोग उन अभागों या पीड़ितों के लिए होता है जो किसी सितम या त्रासदी के सताए हुए हों। इस शे’र में 'ज़ुल्म के मारों' से आशय महबूब के सितम और बेरुख़ी को झेलने वाले आशिक़ों से है। यहाँ आशिक़ अपने उन दिनों को हसरत से याद करता है जब वह माशूक़ के जुफ़ा व ज़ुल्म का शिकार हुआ करता था।
व्युत्पत्ति
Derived from Old Indo-Aryan / Sanskrit 'मारित' (mārita, struck/slain) or 'मार' (māra, death/destruction), via Prakrit and Hindustani 'मारना'.
प्रयोग
Frequently deployed in the genitive construct (such as 'ग़म के मारों' or 'वक़्त के मारों') to denote lovers crushed by fortune or the beloved's harshness.
उदाहरण
वक़्त के मारों को ज़माना कहाँ समझता है।
ज़ुल्म के मारों की आह से अर्श हिल जाता है।
समानार्थी
मज़लूमोंसताए-हुओंपीड़ितोंमुसीबत-ज़दों
संबंधित शब्द
मारामारनाग़म-ज़दासितम-दीदा
