शब्दार्थ
मू-ब-ज़बाँ
mū-ba-zabāñ
hiadjective
अर्थ
रोम-रोम से बोलने वाला; हर बाल का ज़बान बन जाना
विस्तार
शाब्दिक अर्थ है 'हर बाल का ज़बान बन जाना' या रोम-रोम से बोलना। प्रस्तुत शे’र में कंघी (शाना) के हर रेशे या दंदाने को एक मुखर ज़बान की तरह दर्शाया गया है, जो बिखरती ज़ुल्फ़ों को सुलझाने के लिए गहरे अर्थ की क़लम का तक़ाज़ा करती है।
व्युत्पत्ति
Persian compound formed from mū (hair) + ba (by/with) + zabān (tongue).
प्रयोग
Employed in classical ghazal poetry as an exaggerated figure of speech where an entire entity or physical body becomes vocal with complaint or expression.
उदाहरण
इश्क़ के सोज़ में दिल का हर तार मू-ब-ज़बाँ हो गया।
शाना-सिफ़त वो मू-ब-ज़बाँ फ़रियाद करता रहा।
समानार्थी
सरापा-गुफ़्तारगोयामुखर
संबंधित शब्द
मूज़बाँशानाज़ुल्फ़
