शब्दार्थ

मुझी

mujhi

hipronoun

अर्थ

केवल मुझे ही; मुझको ही।

विस्तार

शास्त्रीय शायरी में 'मुझी' सर्वनाम 'मुझ' और बलदायक निपात 'ही' का संयुक्त रूप है। इस शेर में यह आशिक़ की बेबसी को दर्शाता है कि यदि संगदिल माशूक़ को तरस नहीं आता, तो कम से कम स्वयं उसे ही अपनी दयनीय हालत पर दया आ जानी चाहिए थी। यह शब्द आशिक़ के एकाकी दर्द और आत्म-दया को रेखांकित करता है।

व्युत्पत्ति

Hindustani contraction of the first-person oblique pronoun 'mujh' (from Prakrit roots linked to Sanskrit 'mahyam') and the emphatic enclitic 'hī'.

प्रयोग

It is often employed in the ghazal to express dramatic self-pity, personal culpability, or an emphatic contrast between the self and others.

उदाहरण

सारा इल्ज़ाम मुझी पर आया

मुझी से मिरा हाल पूछा न जाए

समानार्थी

मुझे हीमुझको हीसिर्फ़ मुझे

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तुझीउसीमुझमैं
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