शब्दार्थ

भरम

bharam

hinoun

अर्थ

भेद, रहस्य, भ्रम या साख और प्रतिष्ठा।

विस्तार

उर्दू शायरी में 'भरम' का अर्थ भ्रम, राज़ या बाहरी आबरू और मान-सम्मान का पर्दा होता है। इस शेर में इससे अभिप्राय महबूब के लंबे क़द के उस रहस्य या दिखावे से है, जिसका भेद ज़ुल्फ़ों के खुलते ही सामने आ जाएगा। यह शब्द अक्सर किसी छुपी हुई हक़ीक़त या आबरू के क़ायम रहने के संदर्भ में आता है।

व्युत्पत्ति

From Sanskrit भ्रम (bhrama), meaning error, illusion, or confusion; evolved in Prakrit and Hindustani to also mean a secret or held reputation.

प्रयोग

Frequently coupled with verbs like 'खुलना' (to be exposed) or 'रखना' (to preserve dignity) to evoke themes of exposure, facade, and honor in the ghazal.

उदाहरण

भरम खुल न जाए कहीं मेरे दिल का

ख़ामोशी ने ही मेरा भरम क़ायम रक्खा

समानार्थी

राज़भेदपर्दावहम

संबंधित शब्द

भरम खुलनाभरमानाभ्रम
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