शब्दार्थ

भरी

bharī

hiadjective

अर्थ

भरी हुई, आच्छादित, सनी हुई या व्याप्त।

विस्तार

शास्त्रीय काव्य में 'भरी' का प्रयोग किसी भाव या वस्तु से परिपूर्ण, लिपटे अथवा आच्छादित होने के अर्थ में होता है। इस शे'र में यह 'ख़ाक' (धूल) के साथ जुड़कर इश्क़ में क़त्ल हुए आशिक़ के धूल-धूसरित कमज़ोर बदन का चित्र खींचता है। यह धूल से सने शरीर और उस पर बहते सुर्ख़ ख़ून की धारियों के सौंदर्यपरक विरोधाभास को स्पष्ट करता है।

व्युत्पत्ति

Sanskrit 'भृत' (bhṛta) through Prakrit 'भरिअ' (bharia) into Hindustani.

प्रयोग

In ghazal poetry, it frequently pairs with evocative nouns like 'ख़ाक' (dust), 'दर्द' (pain), or 'अश्क' (tears) to amplify an aura of grief and tragic beauty.

उदाहरण

दर्द से भरी हुई एक सदा उभरी।

आँख अश्कों से भरी रह गई।

समानार्थी

पूरलब्बरेज़आलूदासराबोर

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