शब्दार्थ
भड़की
bhaṛkī
hiverb
अर्थ
सुलग कर शोला बनी, धधकी, एकाएक जल उठी।
विस्तार
उर्दू शायरी में 'भड़की' का अर्थ धीमे-धीमे सुलग रही आग का अचानक तेज़ लपटों में बदल जाना है। मीर के इस शेर में इसका प्रयोग दिल में दबे दर्द या इश्क़ की उस आग के लिए हुआ है जो अब तक सुलग रही थी। यदि यह आग पूरी तरह भड़क उठी, तो आशिक़ के पूरे वजूद और हड्डियों को ईंधन की तरह जलाकर राख कर देगी।
व्युत्पत्ति
From Prakrit/Old Hindi onomatopoeic or descriptive roots related to sudden bursting or flaring (bhaṛak-).
प्रयोग
Commonly contrasted with 'sulagna' (to smolder quietly) to dramatize the sudden destructive outbreak of latent passion or despair in a ghazal.
उदाहरण
दबी हुई आग ज़रा सी हवा से भड़की।
दिल में छुपी चिनगारी अचानक भड़की।
समानार्थी
धधकीसुलगीजलीउठी
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