शब्दार्थ
भक्ति
bhakti
hinoun
अर्थ
ईश्वर के प्रति श्रद्धा, उपासना या अनन्य प्रेम।
विस्तार
काव्य और दर्शन में 'भक्ति' का अर्थ ईश्वर अथवा प्रियतम के प्रति निश्छल समर्पण और उपासना है। अल्लामा इकबाल के प्रसिद्ध शेर के इस अनुवाद में यह शब्द 'नियाज़' (विनम्र समर्पण) का भाव व्यक्त करता है, जहाँ माथा सजदों की तड़प लिए प्रस्तुत है।
व्युत्पत्ति
Sanskrit origin, derived from the verbal root 'bhaj' (भज्), meaning to divide, revere, or worship.
प्रयोग
While foundational to Bhakti movement poetry, in Urdu-Hindustani ghazal settings it parallels concepts like 'aqeedat' and 'niyaaz', evoking devout and humble submission.
उदाहरण
सच्ची भक्ति के बिना केवल सजदों का कोई अर्थ नहीं।
उसकी भक्ति में समर्पण और विरह का गहरा रंग था।
समानार्थी
उपासनापूजाआराधनानियाज़
संबंधित शब्द
भक्तउपासनासाधनाश्रद्धा
