शब्दार्थ

बढ़ती

baṛhtī

hiverb (feminine imperfective pa

अर्थ

अधिक होती हुई, तीव्र या विस्तृत होती हुई।

विस्तार

शायरी में 'बढ़ती' किसी कैफियत, भावना या दशा के लगातार तीव्र होने को व्यक्त करता है। प्रस्तुत शे'र में यह 'बेख़ुदी' (आत्म-विस्मृति या मस्तानापन) के निरंतर गहराते और फैलते जाने का द्योतक है। यह आंतरिक स्थिति के उस बहाव को दिखाता है जो धीरे-धीरे चेतना को अपने प्रभाव में ले रहा है।

व्युत्पत्ति

From Sanskrit 'वृध्' (vṛdh, to grow or increase), through Prakrit 'वड्ढइ' (vaḍḍhaï), leading to Hindustani 'बढ़ना' (baṛhnā).

प्रयोग

In ghazal poetry, it frequently pairs with continuative verbs (e.g., 'बढ़ती चली') to evoke the unstoppable momentum of sorrow, passion, or intoxication.

उदाहरण

रात ढलने के साथ दिल की बेकरारी बढ़ती गई।

बढ़ती हुई तड़प को कोई सुकून न मिला।

समानार्थी

ज़्यादा होतीफैलतीतीव्र होती

संबंधित शब्द

बढ़नाबढ़ोतरीबढ़ावा
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