शब्दार्थ

बग़ैर-अज़

baghair-az

hipreposition

अर्थ

के बिना, के सिवा, के अलावा।

विस्तार

यह एक संयुक्त अव्यय है जिसका अर्थ 'के बिना' या 'के सिवा' होता है। प्रस्तुत शेर में यह महबूब के रुख़्सार (चेहरे) के नूरानी दीदार से महरूमी को दर्शाता है, जिसके बिना ज़िंदगी की शाम आ पहुँची। यह विरह और वंचना के अहसास को गहरा करता है।

व्युत्पत्ति

Compound of Arabic 'بغير' (bi-ghayr, without/except) and Persian 'از' (az, from/than).

प्रयोग

Frequently used in classical Urdu poetry to underline exclusion, absolute absence, or the singularity of sorrow.

उदाहरण

बग़ैर-अज़ दीद-ए-यार

बग़ैर-अज़ हसरत-ओ-ग़म

समानार्थी

सिवाएबिनाजु़ज़

संबंधित शब्द

बग़ैरअज़सिवा
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