शब्दार्थ
बख़ील
bakhīl
hiadjective
अर्थ
कंजूस, कृपण, तंगदिल या अनुदार।
विस्तार
शास्त्रीय उर्दू शायरी में 'बख़ील' का अर्थ कंजूस, कृपण या अनुदार व्यक्ति होता है जो कृपा या स्नेह देने में संकोच करे। इस शेर में फ़ितरत (प्रकृति) को बख़ील कहा गया है क्योंकि अपनी पूरी उदारता के बावजूद उसने लाल-ए-नाब (शुद्ध माणिक) को अग्नि तो दी मगर जलने-सुलगने वाला शरारा नहीं दिया। यह परिपूर्ण दिखने वाले वैभव में भी निहित अभाव को रेखांकित करता है।
व्युत्पत्ति
Arabic, derived from the root b-kh-l (ب-خ-ل), signifying parsimony, miserliness, or withholding (bukhl).
प्रयोग
In the ghazal tradition, 'bakhīl' is often set in contrast with 'sakhī' (generous) to complain about the beloved's coldness or the heavens' lack of grace.
उदाहरण
बख़ील आसमां ने करम का एक क़तरा न दिया।
वो नज़र के लुत्फ़ में भी बख़ील निकला।
समानार्थी
कंजूसकृपणममसिकतंगदिल
संबंधित शब्द
बुख़्लसख़ीसख़ावत
