शब्दार्थ

बक्स

baks

hiverb

अर्थ

खिलना, विकसित होना या कली का चटकना।

विस्तार

शास्त्रीय काव्य में 'बक्स' (या बिकस) एक देशज क्रिया-रूप है जिसका आशय कली के खिलने अथवा प्रस्फुटित होने से है। प्रस्तुत शे'र में इसका प्रयोग ज़ख़्मों के ताज़ा होने और चटकने के लिए हुआ है, जिन्हें खिलती हुई कलियों के सदृश चित्रित किया गया है। यह विरह-वेदना में घावों की सुंदरता और प्रफुल्लता को दर्शाता है।

व्युत्पत्ति

Derived from Sanskrit 'vikasati' (विकसति) / 'vikāsa' (विकास), entering early Urdu through Braj Bhasha and Prakrit forms.

प्रयोग

A classical Indic verb common in early Urdu poetry that was gradually replaced by Persianate words like 'shagufta hona' in later ghazal diction.

उदाहरण

कली हो बक्स रही इस चमन में

हर एक ज़ख़्म-ए-जिगर का बकसना

समानार्थी

खिलनाचटकनाविकसना

संबंधित शब्द

कलीशगुफ़्तगीज़ख़्मगुलशन
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