शब्दार्थ
बे-सोज़
be-soz
hiadjective
अर्थ
जलन, तड़प, जोश या दिली अहसास से खाली।
विस्तार
उर्दू शायरी में 'बे-सोज़' उस स्थिति या अभिव्यक्ति को दर्शाता है जिसमें दिली तड़प, इश्क का दर्द या रूहानी जज़्बा न हो। प्रस्तुत शेर में सूफ़ी की महफ़िल के उस ज़िक्र की ओर इशारा है जो आंतरिक तपन और रूहानियत से ख़ाली है। यह औपचारिक रस्मों के खोखलेपन को बयान करता है।
व्युत्पत्ति
Persian compound formed of 'be-' (without, lacking) and 'soz' (burning, passion, grief; from the verb 'sokhtan', to burn).
प्रयोग
In ghazal and Sufi verse, it frequently highlights the contrast between dry outward asceticism and true, burning passion.
उदाहरण
दिल जो बे-सोज़ हो वो इबादत क्या जाने
बे-सोज़ लफ़्ज़ों में कभी तासीर नहीं होती
समानार्थी
बे-दर्दसर्दबे-असरबे-तड़प
संबंधित शब्द
सोज़सोज़-ओ-गुदाज़सोज़-ओ-साज़सोज़िश
