शब्दार्थ

बे-मिन्नत

be-minnat

hiadjective

अर्थ

बिना किसी के अहसान या उपकार के, अहसान-मुक्त।

विस्तार

शास्त्रीय शायरी में 'बे-मिन्नत' का आशय किसी के अहसान या उपकार के बिना आत्मनिर्भर रहने से है। इस शे'र में आशिक़ ने अपने दिल का ख़ून पीकर जीवन बिताया और पाचन-रस (कैमूस) या बाहरी इलाज का भी अहसान नहीं लिया। यह शब्द आशिक़ की ख़ुद्दारी और ग़म सहने के स्वाभिमान को व्यक्त करता है।

व्युत्पत्ति

Persian prefix 'be-' (without) combined with Arabic 'minnat' (favor, obligation, gratitude).

प्रयोग

Frequently used in the ghazal to express the lover's high-minded pride (istighna) and refusal to accept pity, cures, or favors from the beloved, rivals, or physicians.

उदाहरण

ज़िंदगी बे-मिन्नत-ए-ग़ैर बसर करना।

बे-मिन्नत-ए-चारागर ज़ख़्म सहना।

समानार्थी

बे-अहसानबे-नियाज़ख़ुद्दार

संबंधित शब्द

मिन्नतमिन्नत-कशअहसानफ़राग़त
← शब्दकोश पर वापस