शब्दार्थ
बिना-गोश
bina-gosh
hinoun
अर्थ
कान की लौ, कान की जड़ या निचला भाग।
विस्तार
शास्त्रीय उर्दू और फ़ारसी शायरी में 'बिना-गोश' कान की लौ अथवा कान की जड़ को कहते हैं, जिसे महबूब के सौंदर्य के नाज़ुक अंग के रूप में चित्रित किया जाता है। इस शे'र में आशिक़ को सुबह के वक़्त महबूब के कान की लौ या आवेज़े की याद आती है, जिससे उसकी आँख से टपका आँसू किसी दुर्लभ मोती (गौहर-ए-यक-दाना) की मानिंद दिखाई देता है। यह लफ़्ज़ महबूब के रूप-रंग और आभूषणों के वर्णन में आता है।
व्युत्पत्ति
Persian compound of 'bun' (base, root) + 'gosh' (ear), literally meaning the root or base of the ear.
प्रयोग
Commonly used in ghazal poetry within 'sarapa' descriptions to depict the beloved's earlobe and its proximity to jewels and tresses.
उदाहरण
रोशन था सुब्ह-दम वो बिना-गोश नूर से
मोती सा ढुलक आया वो अश्क-ए-बिना-गोश
समानार्थी
कनपटीकान की लौलोलकी
संबंधित शब्द
गोशगौहरआवेज़ाज़ुल्फ़
