शब्दार्थ
बेदाद
bedād
hinoun
अर्थ
अन्याय, ज़ुल्म, अत्याचार या माशूक़ का सितम।
विस्तार
शास्त्रीय शायरी में 'बेदाद' का अर्थ अन्याय, ज़ुल्म या माशूक़ का सितम होता है। प्रस्तुत शेर में इसका तात्पर्य माशूक़ के ज़ुल्म और निष्ठुरता के उस हुनर से है, जिसे आशिक़ के न रहने पर अपनी नुमाइश के लिए कोई योग्य स्थान नहीं मिलता। यह प्रेमी के अभाव में प्रेमिका के नाज़-ओ-सितम के व्यर्थ हो जाने के दर्द को रेखांकित करता है।
व्युत्पत्ति
Persian compound of 'be-' (without, lacking) and 'dād' (justice, equity).
प्रयोग
In the ghazal tradition, 'bedād' denotes the standard, captivating cruelty of the beloved that the lover paradoxically endures and values.
उदाहरण
बेदाद-ए-यार का शिकवा ज़माने से न कर
दौर-ए-फ़लक़ की बेदाद से दिल आज़ुर्दा है
समानार्थी
ज़ुल्मसितमजफ़ाअन्याय
संबंधित शब्द
बेदादगरदादसितमगरदाद-ख़्वाह
