शब्दार्थ
बूझ
boojh
hiverb
अर्थ
समझकर, जानकर या किसी को कुछ मानकर।
विस्तार
प्रस्तुत शे'र में 'बूझ' का प्रयोग 'बूझ कर' के रूप में हुआ है, जिसका अर्थ किसी को कुछ समझकर या मानकर चलना है। शायर ने शैख़ को एक सच्चा और नेक इंसान समझकर उनकी ख़ानक़ाह का रुख़ किया था, पर उनका असली रूप देखकर निराश हुआ। यह क्रिया 'बूझना' (समझना या अर्थ निकालना) से संबंधित है।
व्युत्पत्ति
Derived from Sanskrit 'बुध्यते' (budhyate, meaning 'perceives' or 'understands') through Prakrit 'बुज्झइ' (bujjhaï) into Hindustani.
प्रयोग
Commonly encountered in classical poetry either in the conjunctive sense of 'deeming/understanding' (बूझ कर) or in the context of solving an enigmatic riddle (पहेली बूझना).
उदाहरण
अजनबी को हमराज़ बूझ कर सारा भेद खोल दिया।
इश्क़ के इस पेच-ओ-ख़म को कोई क्या बूझे।
समानार्थी
समझजानक़यासमान
संबंधित शब्द
बूझनासमझ-बूझबूझ-पहेली
