शब्दार्थ
बे-ज़ौक़
be-zauq
hiadjective
अर्थ
रसहीन, सुरुचिहीन या सौंदर्य-बोध से रहित।
विस्तार
उर्दू शायरी में 'बे-ज़ौक़' का आशय सुरुचि, सौंदर्य-बोध अथवा रचनात्मक लगन से महरूम होना है। प्रस्तुत शे'र में कहा गया है कि प्रकृति सौंदर्य-दृष्टि से विहीन नहीं है, बल्कि उसने जो कार्य अधूरा छोड़ा है उसे पूरा करना मनुष्य का दायित्व है।
व्युत्पत्ति
Compound of the Persian privative prefix 'be-' (without) and Arabic 'dhawq' (taste, pleasure, discernment).
प्रयोग
Commonly contrasted with 'ahl-e-zauq' (connoisseurs of art or love) to chide unrefined critics or ascetics who lack emotional warmth.
उदाहरण
महफ़िल में कोई बे-ज़ौक़ न बैठे
बे-ज़ौक़ दिल हुस्न की क़द्र क्या जाने
समानार्थी
बद-ज़ौक़रसहीनबे-लुत्फ़
संबंधित शब्द
ज़ौक़बे-ज़ौक़ीअह्ल-ए-ज़ौक़
