शब्दार्थ
बैज़ा
baiza
hinoun, masculine
अर्थ
अंडा; अंडकार वस्तु या अभेद्य आवरण।
विस्तार
शास्त्रीय काव्य में 'बैज़ा' का शाब्दिक अर्थ अंडा या अंडकार आवरण होता है। प्रस्तुत शे'र में 'बैज़ा-ए-फ़ौलाद' के रूप में यह लोहे के अभेद्य खोल का प्रतीक है जिसे तोड़ना असंभव हो। आशय यह है कि क़फ़स कोई अटूट फ़ौलादी अंडा नहीं है, बल्कि मात्र शिकारी की पाबंदी ही उड़ने से रोके हुए है।
व्युत्पत्ति
Arabic (بَيْضَة, bayḍah), derived from the root b-y-ḍ, referring to whiteness or an egg.
प्रयोग
In ghazal aesthetics, it is employed either as an image of nascent emergence or, when paired with steel, as an emblem of utterly impenetrable captivity.
उदाहरण
बैज़ा-ए-फ़ौलाद
शिकस्त-ए-बैज़ा-ए-हस्ती
समानार्थी
अंडातुख़्म
संबंधित शब्द
बैज़ावीक़फ़सफ़ौलाद
