शब्दार्थ
बे-ख़स्तगी
be-khastagī
hinoun
अर्थ
घाव, चोट या थकान का न होना; अहत अवस्था।
विस्तार
यह शब्द चोट, घाव या थकान से रहित होने की स्थिति को दर्शाता है। शास्त्रीय शायरी में प्रेमी के लिए ज़ख़्म और रंज जीवन की सार्थकता का प्रमाण माने जाते हैं; अतः 'बे-ख़स्तगी' का अर्थ यहाँ उस शून्य अवस्था से है जहाँ प्रेम की तड़प और ज़ख़्म नदारद हों। इसके बिना प्रेमी की हस्ती अधूरी समझी जाती है।
व्युत्पत्ति
Persian compound formed from 'bē-' (without) and 'khastagī' (woundedness, fatigue; from 'khasta', wounded/broken).
प्रयोग
In classical Urdu poetry, woundlessness is paradoxically treated with regret, since enduring pain is seen as the authentic hallmark of the lover.
उदाहरण
दश्त-ए-जुनूँ में बे-ख़स्तगी का कोई मोल नहीं।
रहा न दर्द तो बे-ख़स्तगी भी रास न आई।
समानार्थी
बे-ज़ख़्मीसलामतीआफ़ियत
संबंधित शब्द
ख़स्तगीख़स्ता-हालबे-ज़ारीख़ारी
