शब्दार्थ
बेकराँ
bekaraañ
hiadjective
अर्थ
असीम, जिसका कोई किनारा या सीमा न हो।
विस्तार
शाब्दिक रूप से इसका अर्थ है जिसका कोई तट या किनारा न हो। प्रस्तुत शे'र में यह प्रशंसा के 'बहर' (समुद्र) के विशेषण के रूप में आया है, जिसका आशय है कि प्रशंसा इतनी असीम है कि काग़ज़ का पन्ना कम पड़ गया। यह शब्द शायरी में अपार विस्तार, अथाह दर्द या अनंत प्रेम को दर्शाने के लिए प्रयुक्त होता है।
व्युत्पत्ति
Persian (be- 'without' + karān / karānah 'shore, boundary').
प्रयोग
In classical Urdu poetry, it frequently forms the izafat construct 'bahr-e-bekaraañ' to symbolize limitless grief, mystical love, or divine adoration.
उदाहरण
बहर-ए-बेकराँ की लहरों का कोई अंत नहीं।
उसके ग़म की दास्ताँ इक बेकराँ सहरा जैसी है।
समानार्थी
लामहदूदअसीमबे-पायाँबे-इंतिहा
संबंधित शब्द
बहरसफ़ीनाकिनारासाहिल
