शब्दार्थ
बे-कराँ
be-karāñ
hiadjective
अर्थ
असीम, अनंत, जिसकी कोई सीमा या तट न हो।
विस्तार
शास्त्रीय शायरी में 'बे-कराँ' का अर्थ ऐसे अथाह विस्तार से है जिसका कोई तट या छोर न हो। प्रस्तुत शेर में यह 'मुहीत' (सागर) के विशेषण के रूप में प्रयुक्त होकर ईश्वर की असीमता को दर्शाता है, जिसके सामने साधक स्वयं को एक छोटी जलधारा समझता है। यह शब्द अस्तित्व की नगण्यता और परमात्मा के अनंत स्वरूप के मिलन की तड़प को प्रकट करता है।
व्युत्पत्ति
Persian compound of the negative prefix 'be-' (without) and 'karān' (shore, coast, edge, boundary).
प्रयोग
Commonly used in Sufi and reflective ghazals to contrast the infinite Divine or cosmic reality with finite human frailty.
उदाहरण
बे-कराँ समंदर की मौजें
ग़म का इक बे-कराँ आलम
समानार्थी
असीमअनंतबे-पायाँअथाह
संबंधित शब्द
मुहीतकनाराबे-कनारआबजू
