शब्दार्थ
फँसा
phansā
hiverb
अर्थ
जाल या फंदे में उलझा, क़ैद हुआ।
विस्तार
उर्दू शायरी में यह शब्द प्रेम के जाल में असहाय होकर बंध जाने का भाव व्यक्त करता है। प्रस्तुत शे'र में इसका अर्थ दिल का महबूब की ज़ुल्फ़ों के फंदे में बिना सोचे-समझे क़ैद हो जाना है। यह आशिक़ की बेबसी और आत्मसमर्पण की दशा को उजागर करता है।
व्युत्पत्ति
Derived from Sanskrit 'पाश' (pāśa, snare/noose) via Prakrit 'फास' (phāsa), developing into the Hindustani verb 'फँसना'.
प्रयोग
Frequently deployed in classical ghazals alongside metaphors of snares ('dām') and locks of hair ('zulf') to depict involuntary infatuation.
उदाहरण
दाम-ए-बला में दिल जा फँसा
ज़ुल्फ़ के पेच-ओ-ख़म में फँसा परिंदा
समानार्थी
उलझागिरफ़्तारअसीरक़ैद
संबंधित शब्द
फँसनाफंदाफाँस
