शब्दार्थ
फ़र्ज़
Farz
hinoun
अर्थ
कर्तव्य, अनिवार्यता, लाज़िमी शर्त
विस्तार
उर्दू शायरी में 'फ़र्ज़' का अर्थ धार्मिक कर्तव्य, नैतिक दायित्व या लाज़िमी शर्त होता है। प्रस्तुत शेर में यह तयशुदा नियम या अनिवार्यता के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है, जहाँ शायर प्रश्न करता है कि यह कहाँ आवश्यक या निश्चित है कि सबको एक जैसा ही इंकार का जवाब मिले। यह परंपरा और नियतिवादी धारणाओं पर काव्यात्मक प्रश्नचिह्न लगाता है।
व्युत्पत्ति
Arabic (فَرْض, farḍ), from the root f-r-ḍ meaning to apportion, decree, or make obligatory.
प्रयोग
In ghazal poetry, 'farz' is frequently invoked either in religious dispute against rigid ritualists or idiomatically to question unquestioned social and spiritual dogmas.
उदाहरण
अदा करना मोहब्बत का फ़र्ज़ था
ये कब फ़र्ज़ है कि ख़ामोश रहा जाए
समानार्थी
लाज़िमवाजिबकर्तव्यअनिवार्यता
संबंधित शब्द
फ़र्ज़ीफ़राइज़वाजिबात
