शब्दार्थ
फ़ुरूअ
furū‘
hinoun
अर्थ
शाख़ें, डालियाँ, उप-शाखाएँ या गौण बातें (फ़रअ का बहुवचन)।
विस्तार
शास्त्रीय उर्दू शायरी में 'फ़ुरूअ' का अर्थ मूल या जड़ ('अस्ल') से निकलने वाली शाख़ें या उप-शाखाएँ होता है। इस शे'र में ग़ालिब ने इसका प्रयोग यह दर्शाने के लिए किया है कि जिस तरह शाखाओं का पोषण जड़ से होता है, उसी तरह सार्थक अभिव्यक्ति का मूल स्रोत ख़ामोशी है। यह किसी मूल तत्त्व के बाहरी या द्वितीयक विस्तार का प्रतीक है।
व्युत्पत्ति
Arabic, broken plural of 'far‘' (فرع), from the triconsonantal root f-r-‘ denoting branching out or ascending.
प्रयोग
In the ghazal, it almost exclusively appears in philosophical contemplation as a contrasting pair to 'asl' (origin, root, or essence).
उदाहरण
अस्ल को भूल के हम सिर्फ़ फ़ुरूअ' तक पहुँचे
फ़ुरूअ-ए-इश्क़ में हर रंग आश्कार हुआ
समानार्थी
शाख़ेंडालियाँउपशाखाएँ
संबंधित शब्द
अस्लबुन्यादजड़शाख़
