शब्दार्थ

फेरे

phere

hiverb

अर्थ

घुमाना, फिराना या बार-बार किसी सतह पर चलाना।

विस्तार

प्रस्तुत शेर में 'फेरे' का अर्थ प्यास की शिद्दत में सूखे और तपे हुए होंठों पर ज़बान फिराने से है। यह शब्द अत्यंत लाचारी, तड़प और सहनशक्ति की पराकाष्ठा को उजागर करता है। यहाँ शायर साक़ी-ए-कौसर से इस असहनीय तिश्नगी (प्यास) से राहत पाने की गुहार लगा रहा है।

व्युत्पत्ति

From Prakrit 'फेरेइ' (pherei), traceable to Sanskrit 'स्फेटयति' (spheṭayati) or related Indo-Aryan roots meaning to turn or wander.

प्रयोग

In classical Urdu poetry, passing the tongue over lips ('zabaan pherna') is a poignant trope for overwhelming thirst, dying moments, or intense spiritual longing.

उदाहरण

लब पर ज़बाँ फेरे

मुँह फेरे हुए बैठे हैं

समानार्थी

फिराएघुमाएचलाए

संबंधित शब्द

फेरनाफेराहेर-फेर
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