शब्दार्थ

फ़क़्र

faqr

hinoun

अर्थ

आध्यात्मिक वैराग्य, त्याग, दरवेशी अथवा मुफ़लिसी।

विस्तार

सूफी दर्शन और उर्दू शायरी में 'फ़क़्र' का आशय सांसारिक मोह से मुक्ति, स्वाभिमान और आध्यात्मिक त्याग है। इस शे'र में शायर ऐसी लाचार दरिद्रता को नकारता है जो केवल मुफ़लिसी और दुख लाती है। यहाँ सच्चे स्वाभिमानी वैराग्य और खोखली बेबसी का फ़र्क़ दिखाया गया है।

व्युत्पत्ति

Arabic root f-q-r (ف-ق-ر), originally meaning poverty or need, later elevated in Islamic mysticism to signify sole reliance upon the Divine.

प्रयोग

In classical and modern Urdu poetry, particularly in Iqbal, faqr is celebrated as heroic self-mastery and spiritual kingship rather than mere material destitution.

उदाहरण

फ़क़्र के आगे ताज-ओ-तख़्त की कोई हक़ीक़त नहीं।

उसका फ़क़्र लाचारी नहीं, स्वाभिमान का नाम है।

समानार्थी

दरवेशीइस्तग़्नाक़नाअतमुफ़लिसी

संबंधित शब्द

फ़क़ीरफ़क़ीरीफ़ाक़ादरवेश
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