शब्दार्थ
फ़ाक़ा-मस्ती
faaqa-masti
hinoun
अर्थ
कंगाली और भुखमरी में भी मस्त व बेपरवाह रहने का भाव।
विस्तार
यह शब्द अत्यधिक निर्धनता और अभाव के बावजूद ज़िंदादिली और बेपरवाही से जीने की अवस्था को प्रकट करता है। इस शे'र में यह ग़ालिब के उस फक्कड़पन को दिखाता है जिसमें वे क़र्ज़ लेकर मदिरापान करते हैं, यह समझते हुए भी कि भुखमरी के दौर की यह मौज-मस्ती एक दिन अपना नतीजा ज़रूर दिखाएगी। यह सूफ़ी या रिंद की बेनियाज़ी का प्रतीक है।
व्युत्पत्ति
Compound formed from Arabic 'fāqa' (فاقہ - hunger, poverty) and Persian 'mastī' (مستی - intoxication, ecstasy).
प्रयोग
In classical Urdu ghazal, it is praised as a noble mark of the lover or dervish who scorns material luxury and embraces hardship with cheerful indifference.
उदाहरण
फ़ाक़ा-मस्ती में बसर होती है अपनी ज़िन्दगी।
अमीरी का तसव्वुर क्या, यहाँ बस फ़ाक़ा-मस्ती है।
समानार्थी
फ़क्कड़पनबेफ़िक्रीमस्त-मौली
संबंधित शब्द
फ़ाक़ामस्तीफ़क़ीरीरिंदी
