शब्दार्थ
पलकों
palkoñ
hinoun (feminine, oblique plural
अर्थ
पलकें, आँखों की बरौनियाँ या पपोटे (तिर्यक बहुवचन)।
विस्तार
उर्दू शायरी में 'पलक' का प्रयोग माशूक़ की नज़ाकत, सुरमई आँखों और फ़ितना-अंगेज़ी के लिए होता है। इस शे'र में 'पलकों के साए' से मुराद महबूब की मूँदी या खुलती आँखों की छाँव है, जिसके साए में क़यामत जैसे फ़ितने जन्म लेते हैं। यह आँख के खुलने और नाज़ुक इशारों से उठने वाले हुस्न के हंगामे को दर्शाता है।
व्युत्पत्ति
Sanskrit 'पक्ष्म' (pakṣman) / Hindavi, cognate with Persian 'پلک' (palak/pelk).
प्रयोग
In the ghazal tradition, eyelashes are frequently personified as arrows or canopies harbouring emotional devastation.
उदाहरण
पलकों पर अश्क ठहरना
पलकों की छाँव में सोना
समानार्थी
मिज़्गाँबरौनीपपोटा
संबंधित शब्द
आँखनिगाहदीदासाया
