शब्दार्थ

परेशाँ-गोई

pareshān-goī

hinoun

अर्थ

दुख या व्याकुलता में कही गई बहकी-बहकी और असंबद्ध बातें।

विस्तार

यह शब्द मानसिक व्याकुलता या वियोग की दशा में होने वाले प्रलाप और असंबद्ध बातचीत को व्यक्त करता है। प्रस्तुत शेर में यह शायर की रात भर की उस विलाप-युक्त और उन्मादी गुफ़्तगू को दर्शाता है जिसे सुनकर उसे थोड़ा आराम करने को कहा जा रहा है। यह प्रेम में बेखुदी और मानसिक उथल-पुथल की सशक्त अभिव्यक्ति है।

व्युत्पत्ति

Persian compound of 'parīshān' (scattered, distressed) and 'goī' (speaking/speech, from 'guftan').

प्रयोग

In classical Urdu poetry, it frequently portrays the delirious, rambling utterances of the grief-stricken lover during sleepless nights.

उदाहरण

शब भर मिरी परेशाँ-गोई का तमाशा देखा गया।

दर्द की शिद्दत ने उसे परेशाँ-गोई पर मजबूर कर दिया।

समानार्थी

प्रलापहिज़यानबहकी बातेंवहशत-बयानी

संबंधित शब्द

परेशानीगोयाईबे-रब्तवहशत
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