शब्दार्थ

पर-अफ़्शानी

par-afshānī

hinoun (feminine)

अर्थ

पंख फड़फड़ाना, परों का बिखराव या पंख फैलाना।

विस्तार

शास्त्रीय शायरी में 'पर-अफ़्शानी' का तात्पर्य परिंदे के पर फड़फड़ाने या पंखों को झाड़कर फैलाने से है, जो तड़प, उड़ान या कांति के प्रसार को दर्शाता है। प्रस्तुत शेर में यह हँसी के उल्लास में जुगनू की मानिंद चाँद के सम्मुख चमक या पंख बिखेरने के काव्यात्मक रूपक के रूप में आया है।

व्युत्पत्ति

Persian compound formed from 'par' (wing/feather) and 'afshānī' (scattering/spreading, from the infinitive 'afshāndan').

प्रयोग

Frequently deployed in the ghazal tradition to evoke either a captive bird's restless longing for release or the kinetic display of beauty.

उदाहरण

क़फ़स में पर-अफ़्शानी का आलम

शौक़-ए-परवाज़ में पर-अफ़्शानी

समानार्थी

बाल-अफ़्शानीफड़फड़ाहटपंख-पसार

संबंधित शब्द

परवाज़अफ़्शाँबाल-ओ-परकिर्मक-ए-शब-ताब
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