शब्दार्थ
पेश-रफ़्त
pesh-raft
hinoun
अर्थ
आगे बढ़ना, प्रगति या क़दम आगे बढ़ाना।
विस्तार
शाब्दिक रूप से इसका अर्थ है आगे बढ़ना या अग्रगमन करना। प्रस्तुत शेर में यह प्रेमी के दृढ़ संकल्प और आगे बढ़ने की गति को दर्शाता है, जिसके समक्ष माशूक़ का लंगड़ा बहाना (उज़्र-ए-लंग) नहीं टिक सकता। यह प्रेम के मार्ग पर अडिग रहने की स्थिति को व्यक्त करता है।
व्युत्पत्ति
Persian: compound of 'pesh' (front, ahead) and 'raft' (went, past stem of 'raftan' to go).
प्रयोग
In classical Urdu ghazal, it is often employed metaphorically to express the irresistible momentum of love or fate against feeble pretexts.
उदाहरण
राहे-इश्क़ में दिल की पेश-रफ़्त रुक न सकी।
कोई उज़्र हमारी पेश-रफ़्त को रोक नहीं सकता।
समानार्थी
तरक़्क़ीअग्रगमनपेश-क़दमी
संबंधित शब्द
पेश-क़दमीरफ़्तारपेश-रौ
