शब्दार्थ

पेश-रौ

pesh-rau

hinoun / adjective

अर्थ

आगे चलने वाला, अग्रदूत, अगुआ या हरावल।

विस्तार

शास्त्रीय उर्दू शायरी में 'पेश-रौ' का तात्पर्य आगे चलने वाले अगुआ, अग्रदूत या हरावल दस्ते से है। इस शेर में गालिब ने आँसू (गिर्या) को रंज-ओ-ग़म के जुलूस का पेश-रौ बनाया है, जिसके पीछे आह अलम (झंडा) उठाए चलती है। यह शब्द किसी लश्कर या कारवाँ के नेतृत्व की छवि प्रस्तुत करता है।

व्युत्पत्ति

Persian: compound of 'pēsh' (front, before) and 'rau' (stem of raftan, to go).

प्रयोग

Frequently utilized in ghazals to depict states of passion, tears, or lamentation as vanguard forces of a greater army of love.

उदाहरण

सोज़-ए-दिल का पेश-रौ बन कर अश्क रवाँ हुआ।

कारवाँ-ए-शौक़ में हर ज़ख़्म पेश-रौ निकला।

समानार्थी

अग्रदूतअगुआहरावलपेशवा

संबंधित शब्द

पेश-क़दमक़ाफ़िलाअलम-बरदारराहबर
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