शब्दार्थ

पुर-अफ़्शाँ

pur-afshāñ

hiadjective

अर्थ

चमक बिखेरता हुआ, झिलमिलाता या पंख फड़फड़ाता हुआ।

विस्तार

शास्त्रीय काव्य में यह शब्द सुनहरी चमक बिखेरने अथवा विह्वल होकर पंख फड़फड़ाने की अवस्था को दर्शाता है। प्रस्तुत शेर में यह गुलाब के रंगीन पर्दे के पीछे आईने की झिलमिलाहट और तीव्र बेचैनी को व्यक्त करता है। यह रूप-सौंदर्य के दीदार से उत्पन्न हैरत और आंतरिक कंपन का प्रतीक है।

व्युत्पत्ति

Persian: 'pur' (full of) + 'afshān' (sprinkling/scattering, from afshāndan), alternately read as 'par' (wing/feather) + 'afshān'.

प्रयोग

Employed in the ghazal to signify visual luminescence, shimmering reflections, or rapturous restlessness in the presence of the beloved.

उदाहरण

आईना पुर-अफ़्शाँ है हुस्न के जलवे से

शौक़ की बेचैनी में दिल पुर-अफ़्शाँ हुआ

समानार्थी

दरख़्शाँजल्वा-रेज़मुज़्तरिब

संबंधित शब्द

ज़र-अफ़्शाँअफ़्शाँआईनाहैरत
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